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“विकास हो न हो , बस लहर बनी रहनी चाहिए”

विज्ञान जगत और मेरा समाज
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अभी केंद्र में बी.जी.पी सरकार अपना एक साल पूरा जा रही है। माफ़ी चाहुगा बी.जी.पी. सरकार तो पहले हुआ करती थी जब अटल जी प्रधानमन्त्री थे अब तो बी.जी.पी.सरकार का नया नाम मोदी सरकार पड़ गया है। कोई बी.जी.पी. सरकार कहता ही नही , हर कोई मोदी सरकार कहकर ही सम्बोधित करता है , शायद अब ये व्यक्ति विशेष केंद्रित सरकार है न की पार्टी केंद्रित सरकार तभी नाम बी.जी.पी सरकार से मोदी सरकार हो गया होगा। . अपने इस एक साल के कामकाज में मोदी सरकार ने जो कुछ किया या नही किया ,वो सब जनता के सामने है जहा एक और सरकार के कुछ परम भक्त सरकार की उपलब्धियां गिनाने में लगे हैं। वही दूसरी और अन्य पार्टी के भक्त कटाक्ष करने में लगे हैं। मै किसी पार्टी का भक्त नही हु। लेकिन जब मैंने इन दोनों प्रकार के भक्तो की बातो पर गौर फरमाया जाए तो मेरे अनुसार सरकार के एक साल के काम काज को देखकर मुझे यह अनुभव हुआ कि सरकार को देश के विकास से ज्यादा चिंता देश में मोदी लहर को बनाये रखने की है। ताकि अगली बार भी अपनी सरकार बना सके। बी.जी.पी. के नेता भले ही कुछ काम करे या न करे लेकिन अपने भाषणो के माध्यम से हवा बनाये रखना इनकी आदत में शुमार है।

अभी हमारे देश के माननीय प्रधानमन्त्री जी ने दक्षिण कोरिया में एक भाषण दिया आप लोगो ने देखा ही होगा टी वी पर अपने उस भाषण में उन्होने एक ऐसे वाकया का प्रयोग किया जो कुछ दिन तक मीडिया की सुर्ख़ियो में भी रहा। खैर मैं एक प्रधानमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति से विदेश की धरती पर अपने देश के लिए ऐसे वाक्य बोलने की कल्पना भी नही करता था।

अभी कल ही एक खबर टी वी पर पता लगी कि बी.जी.पी अपने एक साल कि उपलब्धियों को जनता तक पहुचाने के लिए देश भर में 200 रैलियां करेगी . अगर केंद्र सरकार ने वास्तव में आम जनता के हितो से जुड़े हुए अच्छे काम किये होते तो बी.जी.पी. को अपने हवा , अपनी लहर बनाये रखने के लिए इन रैलियों का सहारा नही लेना पड़ता। जो काम करता है ,समझदार जनता उसको खुद महत्व देती है। ये हमारे देश का दुर्भाग्य ही है कि जहा हमारे देश का अन्नदाता किसान एक और आत्महत्या कर रहा है वही हमारे देश कि सरकार किसानो को महत्व न देकर मंगोलिया को अरबो डॉलर दे रही है।

दुसरो का इस्तेमाल करके अपने मन की करवाना बी.जी.पी की फितरत लगती है। इसके हाल ही में दो उदारहण देखे गए हैं पहला बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री माननीय मांझी जी के समय है और दूसरा अभी हाल ही में दिल्ली के ऊपराजयपाल जी का हैं किस तरह उनका प्रयोग करके बी.जी.पी. अपने मन मुताबिक अफसर दिल्ली में बैठना चाहती है। जितना खर्च देश की सरकार 200 रैलियां करने में लगाएगी वो भी सिर्फ देश को अपनी उपलब्धिया गिनाने के लिए उतने खर्च में देश के 200 गाव की तकदीर बदली जा सकती है। मगर अफसोस की सरकार की मानसिकता ऐसी नही है।

इससे बड़ा दुर्भाग्य देश का क्या हो सकता है कि जिस देश में केंद्र में बी.जी.पी. कि सरकार हो और जिस देश के अधिकतर राज्यों में भी बी.जी.पी. की सरकार हो फिर भी देश की आम जनता रोने को मजबूर है , आत्महत्या करने को मजबूर है। जबकि अगर बी.जी.पी चाहे तो इस समय हमारे देश की तकदीर बदल सकती है क्यों कि केंद्र में भी और देश के अधिकतर राज्यों में भी आज बी.जी.पी की सरकार है पर जनता से वोट लेने के बाद ये सब भूल जाते हैं साहब।

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